विभागीय दायित्व एवं ढाँचा
संदर्भ — लाइव नहीं· fmisc.up.gov.in

एफ.एम.आई.एस.सी. उत्तर प्रदेश के बारे में

बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली केन्द्र — जल विज्ञान आसूचना, बाढ़ क्षेत्र जोनिंग एवं बहु-एजेंसी पूर्व चेतावनी का आधुनिकीकरण।

ध्येय एवं मुख्य उद्देश्य

बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली केन्द्र (एफ.एम.आई.एस.सी.) की स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधीन, विश्व बैंक की तकनीकी सहायता से उ.प्र. जल क्षेत्र पुनर्गठन परियोजना (UPWSRP) के अंतर्गत की गई।

एफ.एम.आई.एस.सी. निम्नलिखित हेतु नोडल तकनीकी संस्था के रूप में कार्य करता है:

  • 84 प्रमुख नदी गेज स्थलों से वास्तविक समय स्वचालित टेलीमेट्री आँकड़ा संग्रहण।
  • राप्ती, घाघरा, शारदा एवं गंगा जलग्रहण क्षेत्रों हेतु 07-दिवसीय अग्रिम जलगतिकीय बाढ़ पूर्वानुमान।
  • SAR सूक्ष्मतरंग रडार (सेंटिनल-1A, रीसैट) द्वारा उच्च-विभेदन उपग्रह बाढ़ जलमग्नता मानचित्रण।
  • 3,000 कि.मी. से अधिक बाढ़ सुरक्षा बंधों हेतु डिजिटल तटबंध परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली (EAMS)।
  • नगरीय क्षेत्रों में वैधानिक बाढ़ क्षेत्र जोनिंग नियमों का वैज्ञानिक प्रवर्तन।
संस्थागत संबद्धतासंदर्भ — लाइव नहीं· fmisc.up.gov.in
  • केन्द्रीय जल आयोग (CWC)cwc.gov.in
    45 प्रमुख गेज / निस्सरण प्रेक्षण स्थलों का संचालन तथा 07-दिवसीय अग्रिम जलगतिकीय जलस्तर पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)mausam.imd.gov.in
    उच्च-विभेदन डॉप्लर मौसम रडार पूर्वानुमान, मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (QPF) तथा चक्रवात चेतावनी उपलब्ध कराता है।
  • राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र (NRSC / इसरो)nrsc.gov.in
    आपातकालीन घटनाओं के दौरान त्वरित उपग्रह बाढ़ जलमग्नता मानचित्र (रीसैट, सेंटिनल-1A SAR) प्रसारित करता है।
  • उ.प्र. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA)upsdma.up.nic.in
    आपदा तैयारी, एन.डी.आर.एफ./एस.डी.आर.एफ. तैनाती, राहत शिविर तथा जनपद स्तरीय आपात संचालन का समन्वय करता है।
  • भारतीय सर्वेक्षण विभाग (SoI)surveyofindia.gov.in
    नदी आकृति विश्लेषण हेतु उच्च-परिशुद्धता डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) एवं स्थलाकृतिक आधार मानचित्र उपलब्ध कराता है।
बाढ़ क्षेत्र जोनिंग नियम (उ.प्र. बाढ़ क्षेत्र अधिनियम)संदर्भ — लाइव नहीं· fmisc.up.gov.in
वैधानिक भू-उपयोग एवं सीमांकन नियम

वार्षिक बाढ़ क्षति को कम करने हेतु नदी खंडों को ऐतिहासिक बाढ़ आवृत्ति के आधार पर वैज्ञानिक रूप से संवेद्यता क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है:

निषेधात्मक क्षेत्र (जोन-1)
25 वर्ष में 1 बार बाढ़ आवृत्ति

समस्त स्थायी आवासीय, व्यावसायिक एवं औद्योगिक निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित। केवल नदी तटवर्ती उद्यान, कृषि एवं वनरोपण की अनुमति।

प्रतिबंधात्मक क्षेत्र (जोन-2)
100 वर्ष में 1 बार बाढ़ आवृत्ति

आवासीय निर्माण केवल 100-वर्षीय बाढ़ स्तर से कम से कम 0.6 मी. ऊँचे स्तंभों अथवा प्लिंथ पर अनुमन्य। तहखाने पूर्णतः प्रतिबंधित।

चेतावनी एवं परामर्श क्षेत्र (जोन-3)
100-वर्षीय बाढ़ आवृत्ति से परे

सामान्य निर्माण अनुमन्य, किंतु अनिवार्य बाढ़ आपातकालीन निकासी योजना तथा भूतल से ऊपर आपातकालीन विद्युत कट-ऑफ पैनल आवश्यक।

बाढ़ शब्दावली एवं मानक परिभाषाएँसंदर्भ — लाइव नहीं· fmisc.up.gov.in
चेतावनी स्तर (WL)
वह जलस्तर जिस पर बाढ़ चेतावनी प्रारंभ की जाती है तथा गेज पर चौबीसों घंटे सतर्कता शुरू होती है। सामान्यतः खतरे के स्तर से 1.0 मी. से 1.5 मी. नीचे।
खतरे का स्तर (DL)
वह जलस्तर जिस पर नदी का जल प्राकृतिक तटों से बाहर बहने लगता है तथा निकटवर्ती बस्तियों अथवा कृषि भूमि को जलमग्न करता है।
उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL)
किसी गेज स्थल पर ऐतिहासिक बाढ़ घटनाओं के दौरान अभिलिखित सर्वकालिक अधिकतम नदी जलस्तर।
फ्रीबोर्ड (सुरक्षा ऊँचाई)
अधिकतम संभावित बाढ़ जल सतह तथा तटबंध के शीर्ष स्तर के बीच की ऊर्ध्वाधर सुरक्षा सीमा (उ.प्र. में न्यूनतम 1.5 मी. निर्धारित)।
धारा-परिवर्तन (एवल्शन)
नदी द्वारा अपनी वर्तमान धारा को अचानक छोड़कर तीव्र गति से नया मार्ग बना लेना, जो राप्ती एवं शारदा जैसी तराई नदियों में सामान्य है।
संश्लेषित द्वारक रडार (SAR)
सूक्ष्मतरंग उपग्रह प्रतिबिंबन जो प्रचंड मानसूनी तूफानों के दौरान बादल एवं वर्षा को भेदकर ठहरे हुए बाढ़ जल के विस्तार को चिह्नित कर सकता है।